ब्रेकिंग
सेंधवा कॉलेज में छात्रा पर जानलेवा हमला चाकू मारकर किया घायल सेंधवा: कॉलेज में छात्रा पर चाकू से जानलेवा हमला । घटना से फैली सनसनी इंदौर: बीच शहर में बड़ी कार्रवाई: कान्ह नदी किनारे 50 से अधिक अवैध दुकानों पर चला बुलडोजर । सेंधवा में पत्रकार एकता की नई मिसाल, जमीनी समस्याओं के समाधान के लिए बढ़ाया बदलाव की ओर कदम Video: जम्मू कश्मीर के रिटायर्ड डीजीपी केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट से नाराज सेंधवा: नगर पालिका का सिंगल यूज प्लास्टिक मुक्त शहर जन-जागरूकता अभियान । इंदौर: चॉकलेट फैक्ट्री में निर्धारित सीमा से अधिक 375 क्विंटल शक्कर का मिला स्टॉक, जप्त सेंधवा: मनोकामनेश्वर महादेव मंदिर पर विशाल भंडारा, 15 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने ग्रहण की भोजन प्रस... बड़वानी: कार्य में लापरवाही पर पाटी,ठीकरी ,निवाली बीएमओ को कारण बताओ नोटिस एवं दो बीएमओ के वेतन राजस... देवास : सरकारी जमीन, रास्तों और नालों पर कब्जा करने वालों की अब खैर नहीं
मध्यप्रदेश

इंदौर के डॉक्टरों का कमाल: 130 डिग्री मुड़ी रीढ़ की हड्डी को 13 घंटे की सर्जरी से किया सीधा, लकवे की कगार पर पहुंचे बच्चे को दिया नया जीवन

इंदौर (मध्य प्रदेश): बच्चों में रीढ़ की हड्डी का टेढ़ापन प्रायः शुरुआत में सामान्य और मामूली समस्या समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है।

लेकिन समय रहते सही डॉक्टरी इलाज न मिलने पर यही परेशानी आगे चलकर जीवनभर के लिए गंभीर और जानलेवा रूप ले सकती है। इंदौर में ऐसी ही एक अत्यंत दुर्लभ, जटिल और बेहद चुनौतीपूर्ण चिकित्सीय स्थिति का सफल उपचार शैल्बी हॉस्पिटल (Shalby Hospital) के स्पाइन सर्जरी विभाग में किया गया। जहां 130 डिग्री तक अत्यधिक टेढ़ी हो चुकी रीढ़ की हड्डी वाले 15 वर्षीय बच्चे की करीब 13 घंटे तक चली अत्यंत कठिन सर्जरी के बाद उसे पुनः सामान्य रूप से चलने-फिरने के योग्य बनाया गया है।

🩺 ‘इडियोपैथिक स्कोलियोसिस’ जैसी दुर्लभ बीमारी से पीड़ित था बच्चा, 50 डिग्री से अधिक की स्थिति मानी जाती है गंभीर

शैल्बी हॉस्पिटल के वरिष्ठ स्पाइन सर्जन डॉ. प्रणव कुमार के अनुसार, “बच्चा ‘इडियोपैथिक स्कोलियोसिस’ (Idiopathic Scoliosis) से पीड़ित था, जो कि स्कोलियोसिस बीमारी का सबसे सामान्य रूप माना जाता है। सामान्य चिकित्सीय मानकों के अनुसार, 50 डिग्री से अधिक रीढ़ के टेढ़ेपन को ही अत्यधिक गंभीर श्रेणी में रखा जाता है, जबकि इस बच्चे के मामले में रीढ़ का झुकाव लगभग 130 डिग्री तक पहुंच चुका था।”

प्रारंभिक जांच के दौरान एक्स-रे और सीटी स्कैन की रिपोर्ट्स में स्थिति बेहद चिंताजनक पाई गई। शुरुआत में रीढ़ की विकृति अधिक होने के कारण ऑपरेशन में न्यूरोलॉजिकल डैमेज (पैरालिसिस) का जोखिम काफी ज्यादा था, इसीलिए मेडिकल टीम ने अत्यधिक सावधानी और योजनाबद्ध तरीके से इलाज की दिशा में कदम बढ़ाए।

🏥 पैरों में आने लगे थे लकवे के लक्षण, तड़के से रात 11 बजे तक 13 घंटे चला मैराथन ऑपरेशन

इलाज की प्रक्रिया के दौरान ही बच्चे के दोनों पैरों में धीरे-धीरे लकवे (Paralysis) के लक्षण उभरने लगे और उसे शौच व पेशाब करने में भी गंभीर परेशानी होने लगी।

स्थिति तेजी से बिगड़ने पर विषय-विशेषज्ञों की टीम ने विस्तृत रणनीति बनाकर तत्काल सर्जरी करने का बड़ा निर्णय लिया। सर्जरी सुबह लगभग 10 से 11 बजे के मध्य प्रारंभ हुई और रात लगभग 11 बजे तक अनवरत चली।

ऑपरेशन के प्रथम चरण में रीढ़ की हड्डी को आगे की तरफ से (चेस्ट के रास्ते हृदय के निचले हिस्से के पास पहुंचकर) जकड़न से मुक्त किया गया। इसके बाद द्वितीय चरण में पीछे की ओर से विशेष पेडिकल स्क्रू (Pedicle Screws) लगाकर रीढ़ को सीधा करने का प्रयास किया गया। जब इससे भी अपेक्षित एलाइनमेंट नहीं मिल सका, तो रीढ़ की कुछ हड्डियों (Vertebrae) को नियंत्रित और सुरक्षित तरीके से काटकर उनका संतुलन बनाया गया। कई चरणों में चली इस मैराथन प्रक्रिया के बाद विशेषज्ञ डॉक्टर रीढ़ को संतुलित स्थिति में लाने में पूरी तरह सफल रहे। सर्जरी के चार दिन बाद ही बच्चे के पैरों में संवेदनाएं (Sensations) वापस लौट आईं और वह पैर चलाने लगा है।

⚠️ 5 से 7 और 12 से 15 वर्ष की आयु में तेजी से बढ़ता है टेढ़ापन, शुरुआती पहचान ही बचाव

वरिष्ठ स्पाइन सर्जन डॉ. प्रणव कुमार ने अभिभावकों को जागरूक करते हुए कहा कि, “बच्चों की रीढ़ में दिखाई देने वाले किसी भी प्रकार के असंतुलन या टेढ़ेपन की यदि शुरुआती अवस्था में ही पहचान हो जाए, तो अधिकांश मामलों में विशेष फिजियोथेरेपी व्यायाम और बेल्ट/ब्रेसिंग से स्थिति को आगे बढ़ने से रोका जा सकता है।”

उन्होंने आगे बताया कि, “विशेष रूप से 5 से 7 वर्ष और 12 से 15 वर्ष की आयु वर्ग के दौरान बच्चों की हड्डियों का विकास (Growth Spurt) बहुत तेजी से होता है, इसलिए इस समयावधि में स्कोलियोसिस का टेढ़ापन तेजी से बढ़ सकता है। इस बच्चे के मामले में भी उचित समय पर इलाज न मिलने से बीमारी लगातार बढ़ती रही और अंततः उसके पैरों में पैरालिसिस जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई थी।”

Show More

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button