दिल्ली/NCR
क्लाइंट बाद में विरोधी बन जाए, तब भी वकील उसकी गोपनीय जानकारी का इस्तेमाल उसके खिलाफ नहीं कर सकता।

सुप्रीम कोर्ट ने 21 अगस्त 2026 को Rehana Khan vs. Rizwan Siddiquee (with connected case) मामले में पूर्व वकील रिज़वान सिद्दीकी के दो साल के प्रैक्टिस सस्पेंशन को बरकरार रखा।
जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ने स्पष्ट किया कि वकील का कर्तव्य क्लाइंट के व्यवहार पर निर्भर नहीं करता। वकील को पेशेवर संबंध समाप्त होने के बाद भी क्लाइंट से मिली गोपनीय और संवेदनशील जानकारी की रक्षा करनी होती है।
मामले में आरोप था कि पूर्व वकील ने टीवी इंटरव्यू के दौरान क्लाइंट के साथ हुई गोपनीय बातचीत, रिकॉर्डेड बातचीत और मैसेज एक्सचेंज सार्वजनिक किए तथा उसके मामले पर सार्वजनिक टिप्पणी की।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने अपीलकर्ता द्वारा सजा बढ़ाने की मांग भी स्वीकार नहीं की। कोर्ट ने दोनों पक्षों के आचरण और महत्वपूर्ण तथ्यों को पूरी तरह सामने न रखने पर नाराज़गी जताते हुए दोनों पर ₹5-₹5 लाख का खर्च लगाया, जिसे सुप्रीम कोर्ट लीगल सर्विसेज़ कमिटी में जमा करना होगा।