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पाकिस्तान में नेताओं के झूठे हलफनामे पर कसेगा शिकंजा: चुनाव आयोग बदलने जा रहा है 2017 के कड़े नियम

इस्लामाबाद (पाकिस्तान): लोकतांत्रिक चुनावों में भाग लेने के लिए प्रत्येक प्रत्याशी को नामांकन के समय एक शपथ पत्र (हलफनामा) दाखिल करना होता है, जिसमें उसकी ओर से प्रस्तुत सभी दस्तावेजों व ब्योरे के सत्य होने का दावा किया जाता है।

तथापि, कई अवसरों पर प्रत्याशियों द्वारा असत्य या भ्रामक हलफनामे जमा कर दिए जाते हैं। पाकिस्तान में यह प्रक्रिया वर्षों से निर्बाध रूप से जारी है और बहुसंख्यक नेताओं पर संपत्ति व देनदारियों की गलत जानकारी देने के आरोप लगते रहे हैं। पाकिस्तान का चुनाव आयोग (Election Commission of Pakistan – ECP) अब इस फर्जीवाड़े और असत्य दावों को पकड़ने हेतु अपने विधिक नियमों में बड़ा बदलाव करने जा रहा है।

📜 ‘इलेक्शन रूल्स 2017’ में संशोधन का प्रस्ताव, सांसदों-विधायकों से सीधे जानकारी मांग सकेगा आयोग

पाकिस्तान चुनाव आयोग (ECP) ने ‘चुनाव नियम 2017’ (Election Rules 2017) में संशोधन किए जाने का आधिकारिक प्रस्ताव प्रस्तुत किया है।

इस महत्वपूर्ण विधिक संशोधन के माध्यम से चुनाव आयोग को सांसदों (MPs) एवं विधायकों (MPAs) द्वारा जमा की गई संपत्ति और वित्तीय देनदारियों के ब्योरे के संबंध में सीधे स्पष्टीकरण व प्रामाणिक दस्तावेज मांगने का वैधानिक अधिकार प्राप्त हो जाएगा।

🏢 वित्तीय संस्थानों व सरकारी विभागों को भी तय समयसीमा में जवाब देने के लिए किया जाएगा बाध्य

चुनाव आयोग द्वारा जारी एक आधिकारिक अधिसूचना (Notification) में उल्लिखित है कि आयोग ‘नियम 137’ के अंतर्गत एक नई अनिवार्य शर्त जोड़ने की दिशा में कार्य कर रहा है।

इस प्रस्तावित संशोधन के तहत, यदि किसी सांसद या विधायक की संपत्ति के विवरण में कोई विसंगति, अस्पष्टता या संशय दृष्टिगोचर होता है, तो आयोग संबंधित सदस्य अथवा किसी भी व्यक्ति, प्रशासनिक विभाग, संगठन या वित्तीय संस्थान (Bank/Financial Institution) से सीधे मामले की विस्तृत जानकारी मांग सकता है। ड्राफ्ट के अनुसार, ये सभी संस्थाएं चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित समयसीमा के भीतर पूछे गए प्रश्नों का स्पष्टीकरण व जवाब देने हेतु कानूनी रूप से बाध्य होंगी।

🗓️ 15 अगस्त 2026 तक आम जनता से मांगे गए सुझाव, 19 अगस्त को होगी महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई

पाकिस्तान चुनाव आयोग (ECP) द्वारा नियम संशोधन से संबंधित इस ड्राफ्ट को जन-सामान्य की राय एवं समीक्षा हेतु सार्वजनिक किया गया है।

इस पर 15 अगस्त 2026 तक आम जनता, कानूनी विशेषज्ञों और राजनीतिक दलों से आपत्तियां व सुझाव आमंत्रित किए गए हैं। इसके उपरांत आयोग इन आपत्तियों पर सुनवाई कर अंतिम निर्णय लेगा। इस ड्राफ्ट को चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड कर दिया गया है।

💬 “अचकजई मामले की सुनवाई के मध्य लिया गया बड़ा कदम, औपचारिक अधिसूचना के बाद कानूनी रूप से बाध्य होंगे नेता”: ECP

“यह प्रशासनिक कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब ECP नेशनल असेंबली में विपक्ष के नेता और PkMAP प्रमुख महमूद खान अचकजई के विरुद्ध तीन मामलों की सुनवाई कर रहा है; जिनमें से एक प्रमुख मामला उनकी संपत्ति और देनदारियों के ब्योरे से संबंधित है। इन मुकदमों की अगली सुनवाई 19 अगस्त को होगी। औपचारिक अधिसूचना जारी होते ही यह नियम सभी निर्वाचित प्रतिनिधियों व संस्थाओं पर समान रूप से प्रभावी हो जाएगा।”

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