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लद्दाख के लेह में भूकंप के तेज झटके: रिक्टर स्केल पर 5.5 तीव्रता, पालघर में भी डोली धरती; जानें क्यों आता है भूकंप

लेह (लद्दाख): बुधवार तड़के लद्दाख के लेह क्षेत्र में भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। रिक्टर पैमाने पर इस भूकंप की तीव्रता 5.5 मापी गई है। नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी (NCS) के अनुसार, यह भूकंप सुबह 6:05 बजे आया, जिसका केंद्र जमीन से 10 किलोमीटर की गहराई में था। जिस समय धरती कांपी, वह लोगों के सोकर उठने का समय था। झटके महसूस होते ही लोग बदहवास होकर अपने-अपने घरों से बाहर खुले मैदानों की ओर भाग खड़े हुए, जिससे कुछ समय के लिए अफरा-तफरी मच गई। हालांकि, राहत की बात यह रही कि इसमें किसी प्रकार के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं मिली है। इससे पूर्व महाराष्ट्र के पालघर में भी सोमवार रात एक घंटे के भीतर 3.4 तीव्रता के दो क्रमिक झटके दर्ज किए गए थे।

🌍 आखिर क्यों आता है भूकंप? जानिए इसके पीछे का वैज्ञानिक कारण

भूकंप आने का मुख्य वैज्ञानिक कारण पृथ्वी की आंतरिक परत में मौजूद टेक्टोनिक प्लेटों (Tectonic Plates) का आपस में टकराना, खिसकना या एक-दूसरे के नीचे धंसना है।

वैज्ञानिक विश्लेषणों के अनुसार, हमारी पृथ्वी की ऊपरी सतह (क्रस्ट) मुख्य रूप से 7 बड़ी और कई छोटी-छोटी टेक्टोनिक प्लेटों से निर्मित है। ये प्लेटें पृथ्वी के गर्भ में विद्यमान अर्ध-तरल लावे (मैग्मा) के ऊपर अत्यंत धीमी गति से निरंतर तैरती रहती हैं और प्रतिवर्ष कुछ मिलीमीटर खिसकती हैं। गति के दौरान जब ये प्लेटें आपस में टकराती हैं या घर्षित होती हैं, तो इनके किनारों पर अत्यधिक दबाव उत्पन्न होता है। जब यह आंतरिक दबाव सीमा से अधिक हो जाता है, तो चट्टानें टूट जाती हैं और वर्षों से संचित ऊर्जा अचानक तरंगों (Seismic Waves) के रूप में बाहर निकलती है, जिससे धरातल पर कंपन महसूस होता है।

📊 रिक्टर स्केल पर तीव्रता का वर्गीकरण: जानें किस तीव्रता पर होता है कितना नुकसान

रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता के आधार पर होने वाली तबाही और प्रभाव को निम्नलिखित श्रेणियों में समझा जा सकता है:

  • 0 से 1.9 तीव्रता: अत्यंत सूक्ष्म कंपन। इसे केवल संवेदनशील सिस्मोग्राफ यंत्रों द्वारा ही दर्ज किया जा सकता है।

  • 2.0 से 2.9 तीव्रता: हल्का झटका। कोई नुकसान नहीं होता, केवल लटकते हुए पंखे या वस्तुएं थोड़ी हिल सकती हैं।

  • 3.0 से 3.9 तीव्रता: कमजोर झटका। ऐसा प्रतीत होता है मानो पास से कोई भारी मालवाहक वाहन गुजरा हो।

  • 4.0 से 4.9 तीव्रता: मध्यम झटका। खिड़कियों के कांच टूट सकते हैं, दीवारों पर टंगे फ्रेम गिर सकते हैं और बर्तनों की खनखनाहट सुनाई देती है।

  • 5.0 से 5.9 तीव्रता: खतरनाक झटका। इसमें कच्चे-कमजोर मकान गिर सकते हैं, भारी फर्नीचर अपनी जगह से खिसक जाता है और पक्के मकानों की दीवारों में दरारें आ सकती हैं।

  • 6.0 से 6.9 तीव्रता: गंभीर व खतरनाक झटका। पुरानी या जर्जर इमारतें ढह सकती हैं तथा मजबूत मकानों की नींव को क्षति पहुँच सकती है।

  • 7.0 से 7.9 तीव्रता: भीषण तबाही। बड़ी इमारतें, पुल, खंभे और ओवरब्रिज ताश के पत्तों की भांति धराशायी हो जाते हैं।

  • 8.0 या उससे अधिक तीव्रता: अत्यंत विनाशकारी। विशालकाय संरचनाएं जमींदोज हो जाती हैं और समुद्र में सुनामी का भीषण खतरा उत्पन्न हो जाता है।

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