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रामगढ़ में बड़ा हादसा: निजी पावर प्लांट के फर्नेस में जोरदार धमाका, दर्जनभर मजदूर झुलसे, 2 गंभीर हालत में रांची रेफर

रामगढ़ (झारखंड): झारखंड के रामगढ़ जिले अंतर्गत कुजू थाना क्षेत्र स्थित एक निजी पावर प्लांट में रविवार को फर्नेस में अचानक जोरदार धमाका हो गया। इस भयावह औद्योगिक हादसे में लगभग एक दर्जन मजदूरों के गंभीर रूप से झुलसने की सूचना प्राप्त हुई है। इनमें से कई श्रमिकों की स्थिति अत्यंत चिंताजनक बनी हुई है। अत्यधिक गंभीर रूप से झुलसे दो मजदूरों को प्राथमिक उपचार के पश्चात बेहतर एवं जीवनरक्षक इलाज हेतु तत्काल रांची रेफर कर दिया गया है।

🔥 मेंटेनेंस के दौरान फैला पिघला हुआ गर्म लोहा, केबिन व क्रेन ऑपरेटर भी आए चपेट में

प्रत्यक्षदर्शियों एवं प्रत्यक्षदर्शी कर्मचारियों के अनुसार, फर्नेस से संबद्ध मेंटेनेंस (रखरखाव) और मैग्नेट संचालन का कार्य प्रगति पर था, तभी अचानक एक भयानक धमाका हुआ।

धमाके के साथ ही फर्नेस से अत्यधिक उच्च तापमान वाला पिघला हुआ गर्म लोहा और आग की प्रचंड लपटें चारों तरफ काम कर रहे मजदूरों की दिशा में फैल गईं। बताया जा रहा है कि क्रेन ऑपरेटर और केबिन के भीतर कार्यरत कुछ अन्य मजदूर भी इस आकस्मिक हादसे की सीधी चपेट में आ गए।

🏥 पांच मजदूर अत्यधिक गंभीर रूप से झुलसे, दो की हालत बेहद नाजुक

इस दुखद दुर्घटना में बिहार निवासी रमेश ठाकुर और हजारीबाग के शिवपुरी निवासी नितेश राणा के 90 प्रतिशत से अधिक झुलस जाने का प्रामाणिक विवरण सामने आया है।

दोनों की नाजुक हालत को देखते हुए उन्हें तुरंत रांची रेफर किया गया है। इसके अतिरिक्त, तीन अन्य मजदूरों के भी 40 से 60 प्रतिशत तक गंभीर रूप से झुलसने की पुष्टि हुई है।

🗣️ अस्पताल में घायल मजदूर की आपबीती: “चारों ओर छा गया धुआं और अंधेरा”

चिकित्सालय में भर्ती एक घायल श्रमिक ने घटना का खौफनाक विवरण साझा करते हुए बताया कि अचानक हुए जोरदार विस्फोट के तुरंत बाद संपूर्ण परिसर में घना धुआं और अंधेरा छा गया।

अपनी जान बचाने के लिए मजदूर बदहवास होकर भागने लगे, किंतु तब तक कई लोग आग और खौलती हुई धातु की चपेट में आ चुके थे। उनके कथनानुसार, पांच मजदूर अत्यंत गंभीर अवस्था में झुलसे हैं, जबकि आधा दर्जन से अधिक अन्य श्रमिक भी इस हादसे से प्रभावित हुए हैं।

💳 “मुझे केवल अस्पताल में पैसे जमा करने भेजा गया है”: कंपनी कर्मचारी का बयान

वहीं, उक्त निजी पावर प्लांट के एक कर्मी मृत्युंजय ने मीडिया को अवगत कराया कि उन्हें कंपनी प्रबंधन द्वारा केवल घायलों के इलाज हेतु अस्पताल में धनराशि जमा कराने के लिए भेजा गया है।

उन्होंने कहा कि घटना के वास्तविक कारणों या विस्तृत विवरण के संबंध में उन्हें कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है।

🚔 कुजू थाना पुलिस पहुंची अस्पताल, दर्ज किए घायलों के बयान

हादसे की सूचना प्राप्त होते ही कुजू थाना पुलिस बल त्वरित रूप से अस्पताल पहुंचा।

कुजू थाना के सब-इंस्पेक्टर (SI) राजेश कुमार ने बताया कि अस्पताल में फिलहाल नौ घायल मजदूरों के नाम आधिकारिक रूप से सामने आए हैं। इनमें से दो की अत्यंत गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें उच्च चिकित्सा संस्थान (रांची) रेफर किया गया है, जबकि तीन अन्य मजदूरों की हालत भी चिंताजनक बनी हुई है और चिकित्सक उन्हें भी रांची भेजने की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने आश्वस्त किया कि वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के निर्देशानुसार पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की जाएगी।

📋 हादसे में घायल हुए मजदूरों का विवरण

दुर्घटना में झुलसे जिन मजदूरों का अस्पताल में उपचार जारी है, उनमें प्रमुख रूप से:

  • परमेश्वर महतो (42 वर्ष) — निवासी चटाक दुलमी

  • संजय प्रसाद महतो (45 वर्ष) — निवासी टोला मरार

  • राजेंद्र महतो (45 वर्ष) — निवासी चटाक दुलमी

  • राजेंद्र महतो (35 वर्ष) — निवासी शिवपुरी, हजारीबाग

  • कुंजलाल रविदास — निवासी आराकाटा, कुजू

  • विजय यादव — निवासी दरभंगा, बिहार

  • धनंजय सिंह — निवासी पटना, बिहार

तथा अन्य श्रमिक सम्मिलित हैं। सभी का इलाज स्थानीय व रिफरल अस्पतालों में चल रहा है।

⚙️ फर्नेस ब्लास्ट के कारणों का खुलासा जांच के बाद, सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल

फिलहाल फर्नेस में हुए इस भयानक धमाके के सटीक तकनीकी कारणों का खुलासा नहीं हो सका है।

यह दुर्घटना किसी तकनीकी खराबी, अचानक उपकरण विफलता, मेंटेनेंस में घोर लापरवाही, संचालन संबंधी मानवीय त्रुटि अथवा किसी अन्य कारण से हुई है, इसका निर्धारण विशेषज्ञों की जांच रिपोर्ट के पश्चात ही हो सकेगा। फर्नेस अत्यधिक उच्च तापमान और संवेदनशील जोखिम वाला कार्यक्षेत्र माना जाता है। ऐसे में इस हादसे ने औद्योगिक संयंत्रों में वर्कर सेफ्टी (श्रमिक सुरक्षा), फर्नेस मेंटेनेंस प्रोटोकॉल और इमरजेंसी रिस्पांस सिस्टम (आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली) पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। इस बात की भी गहन जांच आवश्यक है कि हाई रिस्क जोन में मेंटेनेंस के दौरान निर्धारित सुरक्षा मानकों का अक्षरशः अनुपालन किया जा रहा था अथवा नहीं।

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