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Maharashtra CCMP Row: होम्योपैथी डॉक्टरों के पंजीकरण पर बढ़ा विवाद, स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित

महाराष्ट्र में आधुनिक चिकित्सा (एलोपैथी) और होम्योपैथी को लेकर वर्षों से चला आ रहा विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। राज्य सरकार के निर्देश के बाद महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल (MMC) ने ‘सर्टिफिकेट कोर्स इन मॉडर्न फार्माकोलॉजी’ (CCMP) पूरा करने वाले पात्र होम्योपैथिक डॉक्टरों (BHMS) के पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस फैसले के बाद ऐसे डॉक्टरों को तय कानूनी प्रावधानों के तहत आधुनिक (एलोपैथिक) दवाएं लिखने की अनुमति मिल सकेगी। इस निर्णय का इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) और रेजिडेंट डॉक्टरों के संगठन महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स (MARD) ने कड़ा विरोध किया है। विरोध स्वरूप MARD ने राज्यव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है।

महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल ने सरकार के निर्देशों के बाद अधिसूचना जारी कर CCMP कोर्स पूरा कर चुके पात्र BHMS डॉक्टरों को MMC में पंजीकरण की अनुमति देने का फैसला किया है। इस पंजीकरण के बाद वे कानूनी प्रावधानों के अनुसार आधुनिक दवाएं लिख सकेंगे। यह विवाद नया नहीं है। इसकी पृष्ठभूमि वर्ष 2014 में किए गए कानूनी संशोधनों से जुड़ी है, जिनके तहत पात्र होम्योपैथिक डॉक्टरों को सीमित दायरे में आधुनिक चिकित्सा से संबंधित अधिकार देने का प्रावधान किया गया था। हालांकि, इस मुद्दे पर कानूनी चुनौती भी दी गई है और मामला फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है।

🥼 डॉक्टर संगठन क्यों कर रहे हैं विरोध?

इस फैसले के खिलाफ IMA, MARD, FAIMA, ASMI समेत कई एलोपैथिक चिकित्सा संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है। उनका कहना है कि केवल एक वर्ष का CCMP प्रशिक्षण किसी डॉक्टर को आधुनिक चिकित्सा का सुरक्षित और व्यापक अभ्यास करने के लिए पर्याप्त नहीं माना जा सकता। संगठनों का तर्क है कि इससे मरीजों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है और चिकित्सा व्यवस्था के स्थापित मानकों से समझौता होगा। उनका यह भी कहना है कि मरीजों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा होगी कि उनका इलाज किस चिकित्सा पद्धति के डॉक्टर द्वारा किया जा रहा है। इसके अलावा अदालत में मामला लंबित होने के बावजूद पंजीकरण प्रक्रिया आगे बढ़ाने पर भी उन्होंने सवाल उठाए हैं।

🏥 हड़ताल का स्वास्थ्य सेवाओं पर असर

MARD के अनुसार, हड़ताल के शुरुआती दौर में केवल इमरजेंसी और कैजुअल्टी सेवाएं जारी रखी जाएंगी। वहीं ओपीडी, नियमित वार्ड ड्यूटी, वैकल्पिक (इलेक्टिव) सर्जरी और शैक्षणिक गतिविधियां पूरी तरह बंद रहेंगी। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द कोई समाधान नहीं निकाला तो इमरजेंसी सेवाएं भी प्रभावित हो सकती हैं। मुंबई के केईएम, सायन, नायर, जे.जे. अस्पताल समेत राज्य के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों के रेजिडेंट डॉक्टर इस आंदोलन में शामिल हैं।

⚖️ सरकार और समर्थक पक्ष का तर्क

CCMP का समर्थन करने वाले होम्योपैथिक संगठनों का कहना है कि 2014 के कानूनी संशोधन के बाद पात्र BHMS डॉक्टरों को आधुनिक दवाएं लिखने का अधिकार पहले ही मिल चुका है। उनका दावा है कि हजारों प्रशिक्षित डॉक्टर वर्षों से MMC में पंजीकरण का इंतजार कर रहे थे। उनका यह भी कहना है कि ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में डॉक्टरों की भारी कमी है और ऐसे में यह फैसला स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने में मददगार साबित हो सकता है।

❓ विवाद का सबसे बड़ा सवाल

पूरे विवाद का केंद्र यही है कि क्या एक वर्ष का CCMP प्रशिक्षण किसी होम्योपैथिक डॉक्टर को आधुनिक चिकित्सा का अभ्यास करने के लिए पर्याप्त माना जा सकता है। एलोपैथिक डॉक्टर संगठनों का स्पष्ट कहना है कि आधुनिक चिकित्सा के लिए MBBS जैसी विस्तृत पढ़ाई और प्रशिक्षण आवश्यक है। वहीं CCMP प्रशिक्षित होम्योपैथिक डॉक्टरों का तर्क है कि उन्हें कानून के तहत अधिकार मिल चुका है और अब केवल उस प्रावधान को लागू किया जा रहा है।

फिलहाल राज्य सरकार और डॉक्टर संगठनों के बीच गतिरोध जारी है। एक तरफ रेजिडेंट डॉक्टर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं, तो दूसरी ओर सरकार पर स्वास्थ्य सेवाओं को सामान्य बनाए रखने और इस विवाद का जल्द समाधान निकालने का दबाव लगातार बढ़ रहा है।

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