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मध्यप्रदेश

उज्जैन: श्रावण के दूसरे सोमवार पर महाकाल का नगर भ्रमण, रामघाट पर क्षिप्रा जल से पूजन और मिला गार्ड ऑफ ऑनर

उज्जैन (मध्य प्रदेश): पवित्र श्रावण मास के द्वितीय सोमवार के पावन अवसर पर धार्मिक नगरी उज्जैन में विश्वप्रसिद्ध भगवान श्री महाकालेश्वर (बाबा महाकाल) की भव्य व अलौकिक सवारी विधि-विधान के साथ निकाली गई।

इस अवसर पर संपूर्ण उज्जैन नगरी ‘जय श्री महाकाल’ और ‘बम-बम भोले’ के गगनभेदी जयकारों से गुंजायमान हो उठी। महाकाल बाबा चांदी की पालकी में भगवान चंद्रमौलेश्वर स्वरूप में तथा विशालकाय हाथी पर मनमहेश स्वरूप में अपनी प्रजा का हाल जानने और भक्तों को दर्शन देने हेतु नगर भ्रमण पर निकले। सवारी के दर्शन एवं पुण्य लाभ अर्जन हेतु सवारी मार्ग के दोनों ओर हजारों श्रद्धालुओं का अपार जनसैलाब उमड़ पड़ा।

सवारी के पूर्व श्री महाकालेश्वर मंदिर के ऐतिहासिक सभामंडप में भगवान महाकाल का विधि-विधान से षोडशोपचार पूजन व आरती संपन्न कराई गई। यह मुख्य पूजन एवं आरती मंदिर के शासकीय पुजारी पं. घनश्याम शर्मा द्वारा विधिवत पूर्ण की गई, जिसके उपरांत पालकी नगर भ्रमण हेतु प्रस्थान कर गई।

👮 श्री महाकालेश्वर मंदिर के मुख्य द्वार पर दिया गया गार्ड ऑफ ऑनर, पुष्पवर्षा से हुआ स्वागत

बाबा महाकाल की पावन सवारी जब मंदिर प्रांगण से निकलकर मुख्य द्वार पर पहुंची, तो वहां मध्य प्रदेश सशस्त्र पुलिस बल की टुकड़ी द्वारा पालकी में विराजमान भगवान चंद्रमौलेश्वर को सलामी (गार्ड ऑफ ऑनर) दी गई।

वहीं दूसरी ओर हाथी पर सवार मनमहेश स्वरूप पर श्रद्धालुओं एवं मंदिर प्रशासन की ओर से भव्य पुष्पवर्षा की गई। सवारी मार्ग के दोनों ओर कतारबद्ध खड़े श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर देवाधिदेव महादेव का अभिनंदन किया और नतमस्तक होकर आशीर्वाद प्राप्त किया।

🌊 रामघाट पहुंची महाकाल की पालकी, मां क्षिप्रा के पावन जल से हुआ भगवान का अभिषेक व पूजन

गार्ड ऑफ ऑनर एवं सलामी के उपरांत बाबा महाकाल की सवारी परंपरागत मार्गों—गुदरी चौराहा, बक्षी बाजार और कहारवाड़ी से होती हुई पवित्र रामघाट पहुंची।

रामघाट पर मां क्षिप्रा के तट पर पालकी के पहुंचते ही पुजारियों द्वारा मां क्षिप्रा के पवित्र जल से भगवान चंद्रमौलेश्वर स्वरूप का अभिषेक, पूजन-अर्चन व आरती की गई। इसके पश्चात सवारी पुनः अपने निर्धारित पारंपरिक मार्ग—रामानुजकोट, मोढ़ की धर्मशाला, कार्तिक चौक, खाती समाज मंदिर, सत्यनारायण मंदिर, ढाबा रोड, टंकी चौराहा, छत्री चौक, गोपाल मंदिर, पटनी बाजार और गुदरी बाजार से होते हुए पुनः श्री महाकालेश्वर मंदिर वापस लौटी।

💃 जनजातीय लोकनृत्य एवं पारंपरिक प्रस्तुतियों ने बढ़ाई सवारी की भव्यता

सावन सोमवार की इस द्वितीय सवारी में जनजातीय लोककला और नृत्य विशेष आकर्षण का केंद्र रहे।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की विशेष मंशा के अनुरूप मध्य प्रदेश के विभिन्न अंचलों से आए जनजातीय कला दलों को सवारी में सम्मिलित किया गया था। पारम्परिक वेशभूषा में सजे-धजे कलाकारों ने रंगारंग लोकनृत्यों की प्रस्तुतियां देकर श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस नवीन पहल के माध्यम से बाबा महाकाल की सवारी को सांस्कृतिक विविधता और भव्यता प्रदान की जा रही है।

🥁 भजन मंडलियों, डमरू दल और घुड़सवार पुलिस टुकड़ी ने बांधा समां

सवारी में सबसे आगे घुड़सवार दल, राजसी ध्वज तथा पुलिस बल का बैंड चल रहा था।

उनके पीछे विभिन्न संकीर्तन एवं भजन मंडलियां भगवान शिव की स्तुतियों, भजनों और शिव तांडव स्तोत्र का सुमधुर गायन कर रही थीं। उत्साही भक्तजन डमरू, मंजीरे और झांझ बजाते हुए महाकाल की महिमा का बखान कर रहे थे। महिला भजन मंडलियों द्वारा प्रस्तुत शिव स्तुतियों एवं विशाल शिव ध्वज ने पूरे मार्ग को पूरी तरह से भक्तिमय और आध्यात्मिक बना दिया।

📺 चलित रथ एवं एलईडी (LED) स्क्रीन से श्रद्धालुओं को हुए सुलभ दर्शन, आकर्षक रंगोलियों से सजा मार्ग

सवारी मार्ग पर अत्यधिक भीड़ को देखते हुए श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा हेतु चलित रथ (Live Display Van) की विशेष व्यवस्था की गई थी।

रथ में स्थापित बड़ी-बड़ी एलईडी स्क्रीन्स के माध्यम से सवारी का लाइव प्रसारण किया गया, जिससे दूर खड़े श्रद्धालु भी भगवान के सुलभ दर्शन कर सके। संपूर्ण सवारी मार्ग पर मंदिर समिति व के.बी. पंड्या समूह द्वारा चंद्रमौलेश्वर व मनमहेश स्वरूप की मनमोहक व आकर्षक रंगोलियां सजाई गईं, जिसने पूरे आयोजन में अद्वितीय धार्मिक छटा बिखेर दी।

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