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मध्यप्रदेश

मुरैना: सरकारी स्कूल में शिक्षक गायब, 4500 रुपये वाली प्राइवेट शिक्षिका पढ़ाती मिली; हेडमास्टर को मिला नोटिस

मुरैना (मध्य प्रदेश): मध्य प्रदेश के ग्रामीण अंचलों के शासकीय विद्यालयों से शिक्षा व्यवस्था में लापरवाही के नित नए मामले सामने आते रहते हैं, किंतु मुरैना जिले से प्रकाश में आया यह मामला अत्यंत चकित करने वाला है।

आरोप है कि सरकार से 65 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन प्राप्त करने वाले एक शासकीय प्राथमिक विद्यालय के हेडमास्टर (प्रधानाध्यापक) स्वयं बच्चों को पढ़ाने के स्थान पर मात्र 4,500 रुपये मासिक मानदेय पर एक प्राइवेट शिक्षिका को रखकर स्कूल संचालित करवा रहे थे। अर्थात्, शासकीय विद्यालय में सरकारी शिक्षक की जगह किराए की शिक्षिका बच्चों का भविष्य गढ़ रही थी। इस पूरे प्रकरण का सनसनीखेज भंडाफोड़ जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) के आकस्मिक निरीक्षण के दौरान हुआ। डीईओ ने हेडमास्टर की इस घोर अनुशासनहीनता की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर कलेक्टर को प्रेषित कर दी है।

🏫 औचक निरीक्षण में गायब मिले हेडमास्टर, कक्षा में पढ़ाती मिलीं प्राइवेट शिक्षिका प्रीति रावत

वस्तुतः, जिला शिक्षा अधिकारी बीएस इंदौलिया शनिवार को कैलारस तहसील अंचल के भगतपुरा माली, बाजना और पोखर का पुरा स्थित शासकीय प्राथमिक व माध्यमिक विद्यालयों का औचक निरीक्षण (Surprise Inspection) करने पहुंचे थे।

पोखर का पुरा स्थित शासकीय स्कूल में जब डीईओ की टीम प्रविष्ट हुई, तो वहाँ कुल 16 छात्र-छात्राएं उपस्थित मिले, किंतु उन्हें पढ़ाने वाले अधिकृत सरकारी शिक्षक गैरहाजिर थे। कक्षा में बच्चों के अध्यापन की बागडोर एक अप्रशिक्षित प्राइवेट शिक्षिका प्रीति रावत संभाल रही थीं, जबकि विद्यालय के पदस्थ हेडमास्टर अमरलाल रावत गायब पाए गए।

💬 “एक महीने पहले 4,500 रुपये में रखा था”, पूछताछ में शिक्षिका ने खोले हेडमास्टर के राज

जिला शिक्षा अधिकारी ने जब कक्षा में उपस्थित शिक्षिका प्रीति रावत से गहन पूछताछ की, तो उसने बताया कि वह स्कूल में 4,500 रुपये प्रति माह के निजी भुगतान पर बच्चों को पढ़ाने आती है।

शिक्षिका ने खुलासा किया कि हेडमास्टर ने लगभग एक माह पूर्व ही उसे अध्यापन कार्य हेतु नियुक्त किया था। उसने यह भी उजागर किया कि हेडमास्टर महोदय एक दिन पूर्व विद्यालय आए थे, केवल उपस्थिति पंजी (Register) में हस्ताक्षर किए और चले गए। शिक्षिका ने यह सनसनीखेज दावा भी किया कि हेडमास्टर नियमित रूप से पढ़ाने नहीं आते और उनसे पूर्व भी कई अन्य प्राइवेट शिक्षक यहाँ बच्चों को पढ़ाते रहे हैं।

📜 जिला शिक्षा अधिकारी ने हेडमास्टर को थमाया कारण बताओ नोटिस, 3 दिन में मांगा जवाब

यदि विभागीय जांच में ये आरोप पूर्णतः प्रमाणित हो जाते हैं, तो बड़ा प्रश्न यही उठता है कि सरकारी विद्यालय में नौनिहालों का भविष्य आखिर कब से प्राइवेट शिक्षकों के भरोसे चल रहा था।

मामला प्रकाश में आते ही शिक्षा विभाग ने कठोर दंडात्मक कार्रवाई प्रारंभ कर दी है। जिला शिक्षा अधिकारी बीएस इंदौलिया ने आरोपी हेडमास्टर अमरलाल रावत को कारण बताओ नोटिस जारी कर तीन दिवस की समयावधि में स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। जांच प्रक्रिया पूर्ण होने के पश्चात ही इस फर्जीवाड़े की संपूर्ण पटकथा स्पष्ट हो सकेगी।

⚖️ नियमों के विरुद्ध है प्राइवेट टीचर रखना, निलंबन और बर्खास्तगी की तैयारी

प्रकरण के संबंध में जानकारी देते हुए जिला शिक्षा अधिकारी बीएस इंदौलिया ने बताया, “कैलारस क्षेत्र में विभागीय निरीक्षण के दौरान एक प्राथमिक विद्यालय में अनधिकृत प्राइवेट शिक्षिका बच्चों को अध्यापन कराते पाई गई। किसी भी शासकीय विद्यालय में निजी शिक्षक को रखवाकर अध्यापन कराना मध्य प्रदेश सिविल सेवा आचरण नियमों के पूरी तरह विपरीत है। इस कृत्य की विस्तृत जांच रिपोर्ट तैयार कर वरिष्ठ अधिकारियों को प्रेषित कर दी गई है। हेडमास्टर से जवाब प्राप्त होने के उपरांत उनके विरुद्ध निलंबन एवं सेवा समाप्ति (बर्खास्तगी) की कठोर कार्रवाई संपादित की जाएगी।”

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