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मध्यप्रदेश

ऐतिहासिक धार भोजशाला की मां वाग्देवी प्रतिमा की भारत वापसी अंतिम चरण में, लंदन से जल्द लौटेगी मूर्ति

धार/भोपाल (मध्य प्रदेश): मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक एवं पौराणिक भोजशाला परिसर से जुड़ी मां वाग्देवी (देवी सरस्वती) की प्राचीन अलौकिक प्रतिमा की भारत वापसी की प्रक्रिया अब अपने अंतिम चरण में पहुँच गई है।

दशकों से लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम (British Museum) में सुरक्षित रखी गई यह ऐतिहासिक प्रतिमा शीघ्र ही भारत लौट सकती है। यद्यपि, प्रतिमा की स्वदेश वापसी की खबर के साथ ही सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह उठ रहा है कि भारत लाने के उपरांत इसे कहाँ स्थापित किया जाएगा। क्या प्रतिमा को उसके मूल स्थान धार स्थित भोजशाला में पुनः विराजित किया जाएगा अथवा किसी राष्ट्रीय संग्रहालय (National Museum) में सुरक्षित रखा जाएगा? फिलहाल इस विषय पर अंतिम आधिकारिक निर्णय होना शेष है।

🏛️ केंद्रीय संस्कृति सचिव ने दी जानकारी: आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी, राजनयिक मिशनों के साथ तालमेल जारी

भोपाल में आयोजित ‘ब्रिक्स सांस्कृतिक कार्य समूह’ (BRICS Cultural Working Group) की बैठक से पूर्व केंद्रीय संस्कृति सचिव विवेक अग्रवाल ने इस विषय पर प्रामाणिक जानकारी साझा की।

उन्होंने बताया कि मां वाग्देवी की दिव्य प्रतिमा की स्वदेश वापसी हेतु सभी अनिवार्य विधिक व प्रशासनिक औपचारिकताएं पूर्ण कर ली गई हैं। वर्तमान में भारत सरकार, भारतीय राजनयिक मिशनों (Indian Diplomatic Missions) और ब्रिटिश म्यूजियम के मध्य औपचारिक हस्तांतरण की प्रक्रिया द्रुत गति से आगे बढ़ रही है। उन्होंने रेखांकित किया कि भारत सरकार विदेशों में मौजूद अपनी प्राचीन सांस्कृतिक धरोहरों की पुनर्प्राप्ति हेतु समर्पित अभियान चला रही है।

📍 स्वदेश लौटने के उपरांत कहां स्थापित होगी प्रतिमा? ASI और संस्कृति मंत्रालय लेंगे अंतिम निर्णय

प्रतिमा की स्थायी स्थापना को लेकर फिलहाल केंद्र अथवा राज्य सरकार की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा जारी नहीं की गई है।

प्रशासनिक एवं पुरातात्विक सूत्रों के अनुसार, भारत आगमन के पश्चात प्रतिमा को सर्वप्रथम भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) और केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय की प्रत्यक्ष निगरानी में अति-सुरक्षित वातावरण में रखा जाएगा। तदोपरांत, उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) में लंबित भोजशाला विवाद, सुरक्षा व्यवस्था तथा प्रशासनिक परिस्थितियों का समग्र मूल्यांकन कर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। यदि परिस्थितियां अनुकूल रहीं, तो प्रतिमा को धार स्थित मूल भोजशाला परिसर में स्थापित किया जा सकता है।

⚖️ भोजशाला विवाद का कानूनी पक्ष: हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला और सुप्रीम कोर्ट की स्थिति

धार की ऐतिहासिक भोजशाला लंबे समय से धार्मिक एवं विधिक चर्चा का केंद्र रही है।

हिंदू पक्ष इसे परमार कालीन राजा भोज द्वारा स्थापित मां वाग्देवी का भव्य मंदिर व ज्ञान केंद्र मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद का भाग दावा करता है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश पर वर्ष 2024 में एएसआई (ASI) ने 98 दिनों तक वैज्ञानिक सर्वेक्षण किया था, जिसमें मंदिर स्थापत्य, देवी-देवताओं की मूर्तियां और संस्कृत-प्राकृत शिलालेख प्राप्त हुए थे। मई 2026 में हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने भोजशाला को मूलतः मां सरस्वती का मंदिर स्वीकारते हुए पूजा की अनुमति दी थी, जिसे बाद में सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई।

📜 1875 में खुदाई में मिली थी प्रतिमा, 1886 में अंग्रेज ले गए थे लंदन

इतिहासविदों और एएसआई के अभिलेखों के अनुसार, वर्ष 1875 में ब्रिटिश अधिकारी मेजर जनरल विलियम किंकेड द्वारा कराई गई खुदाई के दौरान मां सरस्वती की यह अति-दुर्लभ प्रतिमा प्राप्त हुई थी।

तत्पश्चात अंग्रेज इसे भारत से ले गए और 1886 में लंदन पहुँचाकर ब्रिटिश म्यूजियम में प्रदर्शित कर दिया गया। ऐतिहासिक साक्ष्यों के अनुसार 11वीं शताब्दी में परमार वंश के प्रतापी राजा भोज ने भोजशाला का निर्माण कराया था, जो केवल एक धार्मिक स्थल ही नहीं, अपितु दर्शन, साहित्य, विज्ञान और सनातन ज्ञान परंपरा का विश्वप्रसिद्ध विश्वविद्यालय था।

🌐 सांस्कृतिक धरोहरों की वापसी के राष्ट्रीय अभियान पर टिकीं देशवासियों की निगाहें

भारत सरकार द्वारा पिछले कुछ वर्षों में सैकड़ों ऐतिहासिक मूर्तियों और पुरावशेषों को अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया तथा यूरोपीय देशों से सफलतापूर्वक भारत वापस लाया जा चुका है।

मां वाग्देवी की प्रतिमा की वापसी को भी इसी राष्ट्रीय अभियान की एक महान उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। अब संपूर्ण देश की निगाहें इस बात पर टिकी हुई हैं कि राजनयिक प्रक्रिया कब पूर्ण होती है और सदियों के लंबे अंतराल के पश्चात यह ऐतिहासिक प्रतिमा अपनी पावन जन्मभूमि लौटने के बाद आखिरकार भोजशाला पहुँचेगी या किसी संरक्षित राष्ट्रीय संग्रहालय की शोभा बढ़ाएगी।

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