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मध्यप्रदेश

सावन में क्यों झूलते हैं झूला? गुना में सावन आते ही पड़े झूले, जानें शिव-पार्वती और राधा-कृष्ण से जुड़ी पौराणिक कथाएं

गुना (मध्य प्रदेश): सनातन धर्म में सावन मास का अत्यंत पावन और विशेष धार्मिक महत्व है। इस संपूर्ण माह में श्रद्धालु भगवान शिव की भक्ति में लीन रहकर उनका जलाभिषेक व विशेष पूजन-अर्चन करते हैं।

सुहागिन महिलाएं और कुंवारी कन्याएं सावन सोमवार का व्रत रखकर महादेव एवं माता पार्वती से अखंड सौभाग्य और मनचाहे वर की प्रार्थना करती हैं। पूजा-पाठ के अतिरिक्त सावन माह में झूला झूलने की प्राचीन लोक-परंपरा भी अत्यंत फलदायी मानी जाती है। मध्य प्रदेश के गुना जिले में भी सावन मास के आगमन के साथ ही विभिन्न स्थानों और उद्यानों में झूले सज गए हैं।

🔱 भगवान शिव ने मानसरोवर के कैलाश पर्वत पर तैयार किया था पहला दिव्य झूला

सावन का महीना आते ही प्रकृति में भी रमणीय परिवर्तन देखने को मिलते हैं। चारों ओर मूसलाधार बारिश से मिट्टी की सौंधी खुशबू फैलती है और धरती हरियाली की चादर ओढ़ लेती है।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जगतपिता भगवान शिव ने माता आदिशक्ति पार्वती की इच्छा पर मानसरोवर स्थित कैलाश पर्वत पर एक अत्यंत सुंदर झूला निर्मित किया था। इस अलौकिक झूलन उत्सव को भगवान शिव और माता पार्वती के अटूट और निश्छल प्रेम का अमर प्रतीक माना जाता है।

🌳 बरगद के वृक्ष पर शिव-पार्वती ने झूला था झूला, दांपत्य जीवन में बढ़ता है अपार प्रेम

धर्माचार्य पंडित मोहित चतुर्वेदी बताते हैं कि शिवपुराण में भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य प्रेम का विस्तृत वर्णन मिलता है।

माता पार्वती ने 108 जन्मों तक कठोर तपस्या करके भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त किया था। तत्पश्चात भगवान शिव और माता पार्वती ने प्रेम यात्रा के दौरान एक विशाल बरगद के वृक्ष की जटाओं का झूला बनाकर साथ में झूला झूला था। मान्यता है कि सावन मास में पति-पत्नी यदि एक साथ झूला झूलते हैं, तो उनके दांपत्य जीवन में अपार प्रेम और मधुरता में वृद्धि होती है। इसके अतिरिक्त श्रीमद्भागवत महापुराण में भी भगवान श्री कृष्ण और श्री राधा रानी के झूलन उत्सव का वर्णन मिलता है।

🛕 ब्रज में धूमधाम से मनाया जाता है झूलन उत्सव, राधा-कृष्ण को अर्पित किया जाता है हरियाली श्रृंगार

सावन के पावन माह में वृंदावन और संपूर्ण ब्रजमंडल में श्री राधा-कृष्ण की मधुर लीलाओं को समर्पित ‘झूलन उत्सव’ अत्यंत हर्षोल्लास के साथ आयोजित किया जाता है।

इस दौरान भव्य मंदिरों में भगवान श्री राधा-माधव की दिव्य मूर्तियों को सुंदर झूलों में विराजित कर झुलाया जाता है। गांवों में बड़े-बड़े वृक्षों की शाखाओं पर लंबे झूले डाले जाते हैं। सावन की सबसे प्रमुख विशेषता प्रभु का ‘हरियाली श्रृंगार’ है, जिसमें मंदिरों में भगवान को हरे रंग के वस्त्र और प्राकृतिक पत्तों-फूलों से सजाया जाता है।

💚 सुहागिनों के लिए खास है सावन का महीना, हरी चूड़ियां और हरे वस्त्र धारण करने की परंपरा

सावन माह में महिलाएं और युवतियां विशेष रूप से हरे रंग के वस्त्र धारण करना पसंद करती हैं।

इसके साथ ही हरी चूड़ियां पहनना सौभाग्य का सूचक माना जाता है। सुहागिन महिलाएं सावन सोमवार का व्रत रखकर अपने पति की दीर्घायु और निरोगी जीवन की कामना करती हैं। यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था को सुदृढ़ करता है, बल्कि मानवीय संबंधों में प्रेम और उल्लास की भावना को भी जीवंत बनाए रखता है।

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