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धार्मिक

सावन में कांवड़ खंडित होने पर न हों भयभीत, शास्त्र सम्मत नियमों का पालन कर पुनः शुरू करें यात्रा

सावन का पवित्र महीना भगवान शिव के भक्तों के लिए अत्यंत पावन एवं कल्याणकारी माना जाता है। इस दौरान लाखों श्रद्धालु गंगाजल भरकर भगवान आशुतोष का जलाभिषेक करने हेतु कांवड़ यात्रा निकालते हैं।

कांवड़ यात्रा अत्यंत कड़े नियमों, निष्ठा और पवित्रता की प्रतीक मानी जाती है। यात्रा के दौरान यदि किसी अनजानी भूल, दुर्घटना या स्पर्श के कारण कांवड़ जमीन से छू जाए, उसका ढांचा टूट जाए अथवा गंगाजल अशुद्ध हो जाए, तो इसे धार्मिक शब्दावली में ‘कांवड़ खंडित होना’ कहा जाता है। ऐसे संवेदनशील अवसर पर श्रद्धालुओं को हतोत्साहित अथवा भयभीत होने की तनिक भी आवश्यकता नहीं है। धर्मशास्त्रों में दिए गए कतिपय नियमों एवं शुद्धिकरण के उपायों का पालन करके यात्रा को पुनः श्रद्धापूर्वक प्रारंभ किया जा सकता है।

🙏 क्षमा याचना करें और अशुद्ध जल त्यागकर निकटतम स्रोत से पुनः भरें पवित्र गंगाजल

यदि यात्रा के मध्य कांवड़ खंडित हो जाती है, तो निराश होने के स्थान पर श्रद्धालु को तुरंत उसी स्थान पर रुक जाना चाहिए।

तत्पश्चात भगवान भोलेनाथ और माता गंगा से अनजाने में हुई त्रुटि हेतु सच्चे हृदय से क्षमा याचना करनी चाहिए। इस स्थिति में जल की पवित्रता का ध्यान रखना परम आवश्यक है। यदि गंगाजल जमीन पर गिर गया है या अशुद्ध हो गया है, तो उस जल को शिवलिंग पर कदापि अर्पित न करें। श्रद्धालु को किसी निकटतम पवित्र नदी, गंगा घाट या प्रामाणिक जल स्रोत से पुनः नया पवित्र गंगाजल भरना चाहिए। नया जल भरकर ही आगे की यात्रा का शुभारंभ करना चाहिए। महादेव अपने भक्तों के सच्चे भाव को सहर्ष स्वीकार करते हैं।

🛕 कांवड़ का सही शुद्धिकरण या परिवर्तन: धूप-दीप और गंगाजल से पुनः करें जागृत

यदि कांवड़ का ढांचा टूट गया है, तो उसे तत्काल ठीक कराएं अथवा नई कांवड़ प्राप्त कर उस पर पवित्र गंगाजल छिड़कें।

इसके उपरांत धूप-दीप दिखाकर वैदिक मंत्रों द्वारा उसे पुनः जागृत और शुद्ध करें। टूटी अथवा क्षतिग्रस्त कांवड़ के साथ यात्रा में आगे बढ़ना शास्त्र सम्मत नहीं माना जाता। अतः यदि ढांचा अधिक क्षतिग्रस्त हो गया हो, तो नई कांवड़ का उपयोग करना ही सर्वश्रेष्ठ रहता है। नई कांवड़ लेने के बाद उसे गंगाजल से प्रोक्षित (साफ) करें और पूजन कर पुनः पवित्र करें। इस शास्त्रीय प्रक्रिया से कांवड़ की शुचिता पुनः स्थापित हो जाती है। बिना शुद्धिकरण किए कांवड़ को आगे ले जाने से बचना चाहिए।

🕉️ प्रायश्चित संकल्प और 108 बार “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप कर पुनः करें प्रस्थान

कांवड़ को विधिवत शुद्ध करने के उपरांत प्रायश्चित संकल्प लें।

संगत के वरिष्ठ कांवड़ियों अथवा गुरुजनों के परामर्श से 108 बार “ॐ नमः शिवाय” महामंत्र का जाप करें। इसके साथ ही अपनी सामर्थ्य अनुसार किसी निर्धन अथवा जरूरतमंद को अन्न, फल या वस्त्र दान करने का मन में संकल्प लें और पुनः पूर्ण निष्ठा से यात्रा आरंभ करें। मंत्र जाप से चित्त शांत होता है और अनजाने में हुई भूल का प्रायश्चित भी संपन्न हो जाता है। भगवान शिव केवल सच्चे भाव के भूखे हैं; निश्छल भक्ति होने पर वे हर भूल क्षमा कर देते हैं। अतः मन में किसी प्रकार का भय न रखें और अटूट भक्ति के साथ अपनी कांवड़ यात्रा पूर्ण करें।

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