ब्रेकिंग
237 यूनिट रक्तदान के साथ मंदिर ने दोहराया सेवा का संकल्प, सनातनी विनोद कुमार बिंदल ने रक्तदाताओं को ... सांसद गजेंद्र सिंह पटेल ने किया ठीकरी में 1 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूम... सेंधवा: पहली बार रावण के साथ कुंभकरण और मेघनाथ के पुतलों का होगा दहन ! सेंधवा: संकट मोचन बालाजी सेवा समिति द्वारा 16 किमी की विशाल चुनरी पदयात्रा । इंदौर में 20 जगह से खाद्य नमूने जांच हेतु संग्रहित, शिकायतों पर प्रतिष्ठानों का निरीक्षण 500 मीटर की चुनरी यात्रा में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब, मोंटू सोलंकी की टीम ने किया भव्य स्वागत .. सेंधवा पहुंचे प्रसिद्ध कथा वाचक प्रदीप मिश्रा का नगर पालिका अध्यक्ष बसन्ती बाई यादव ने किया स्वागत अ... सेंधवा: महाराजा अग्रसेन जयंती महोत्सव का भव्य शुभारंभ, वरिष्ठ समाजजनों का सम्मान, मुसाखेड़ी के लगभग 130 मकानों को हटाने की कार्रवाई जारी !. बड़वानी: 114 पटवारियों पर सख्त कार्रवाई 6 पटवारियों की सेवा समाप्त 102 को कारण बताओ नोटिस,और 6 निलंब...
Uncategorized

कोरबा में वोकल फॉर लोकल और पर्यावरण संरक्षण का संदेश, धवईपुर की महिलाएं बना रहीं इको-फ्रेंडली राखियां

कोरबा (छत्तीसगढ़): रक्षाबंधन के पावन पर्व को लेकर पर्यावरण संरक्षण और ‘वोकल फॉर लोकल’ का सशक्त संदेश छत्तीसगढ़ के कटघोरा विकासखंड में स्पष्ट रूप से झलक रहा है। धवईपुर की महिला स्व-सहायता समूह की सदस्य इस वर्ष अत्यंत खास एवं आकर्षक किस्म की राखियां तैयार कर रही हैं। समूह द्वारा निर्मित इको-फ्रेंडली और पूर्णतः स्वदेशी राखियां स्थानीय बाजार में आकर्षण का मुख्य केंद्र बनी हुई हैं। इन पारंपरिक राखियों की न केवल स्थानीय स्तर पर, अपितु दूर-दराज के थोक बाजारों में भी भारी मांग (डिमांड) देखने को मिल रही है।

🌾 रुद्राक्ष, कौड़ी, धान और दालों का उपयोग, प्राकृतिक सामग्री से मिल रहा आध्यात्मिक स्पर्श

धवईपुर की कर्मठ महिलाओं ने किसी भी प्रकार के प्लास्टिक या पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले कृत्रिम पदार्थों का बहिष्कार करते हुए पूरी तरह प्राकृतिक और जैविक सामग्रियों से राखियां तैयार की हैं।

इन राखियों के निर्माण में मुख्य रूप से रुद्राक्ष और कौड़ी का प्रयोग किया गया है, जो लोगों को पारंपरिक और आध्यात्मिक महत्व से जोड़ने का कार्य करता है। इसके अतिरिक्त रक्षा सूत्र के पावन प्रतीक के रूप में मौली धागा, धान, चावल और दाल का उपयोग किया गया है, जो अन्नपूर्णा देवी के आशीर्वाद और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता दर्शाने का अनुपम संदेश देता है।

🎨 छत्तीसगढ़ी लोक संस्कृति और माटी की खुशबू से महक रहीं हस्तनिर्मित राखियां

इन राखियों की सबसे प्रमुख विशेषता इनकी ‘छत्तीसगढ़ी थीम’ है। इन्हें पूरी तरह से राज्य की समृद्ध लोक संस्कृति और ग्रामीण परंपराओं को ध्यान में रखकर गढ़ा जा रहा है।

राखियों की बनावट और सजावट में छत्तीसगढ़ की पारंपरिक कला, माटी की सौंधी खुशबू और लोक धरोहर साफ झलकती है। यह अभिनव प्रयास भाई-बहन के पवित्र स्नेह-बंधन को प्रगाढ़ करने के साथ-साथ स्थानीय संस्कृति एवं धरोहर को सहेजने का भी महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है।

💬 3 से 4 हजार राखियां निर्मित, बाजार से मिल रही भारी डिमांड: समूह सचिव पूजा नेटी

यह रचनात्मक पहल ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक स्वावलंबन और स्वरोजगार का एक सशक्त माध्यम बनकर उभरी है।

महिला समूह की सचिव पूजा नेटी ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए बताया कि, “हमने अब तक 3 से 4 हजार इको-फ्रेंडली राखियों का निर्माण कर लिया है। इसके लिए हमने स्थानीय स्तर पर आसानी से उपलब्ध रुद्राक्ष, मौली धागा, धान, चावल और दाल का उपयोग किया है। बाजार से बहुत अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है और व्यापारी हमारी राखियों की गुणवत्ता की सराहना करते हुए अग्रिम ऑर्डर दे रहे हैं।”

💰 20-25 हजार की लागत पर 35 हजार तक का शुद्ध मुनाफा, घर बैठे मिल रहा आजीविका का साधन

समूह की सक्रिय सदस्य सुनीता ने आर्थिक लाभ का ब्यौरा देते हुए बताया कि इन राखियों का निर्माण कर वे काफी अच्छा मुनाफा अर्जित कर रही हैं।

उन्होंने बताया कि लगभग 20 से 25 हजार रुपये की शुरुआती लागत लगाकर समूह को 30 से 35 हजार रुपये का शुद्ध मुनाफा प्राप्त हो जाता है। महिलाओं को काम की तलाश में कहीं बाहर जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती; घर के समीप क्लस्टर में ही रोजगार का बेहतर प्रबंध हो गया है, जिससे उनके परिवारों का जीविकोपार्जन सुगमता से चल रहा है। इस वर्ष पूरी तरह से छत्तीसगढ़ी थीम पर आधारित होने के कारण इन राखियों की लोकप्रियता और मांग में ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की गई है।

Show More

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button