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कैथल बच्ची दुष्कर्म-हत्याकांड में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: दोषी की फांसी 50 साल की सख्त उम्रकैद में तब्दील, 73 लाख का जुर्माना

कैथल (हरियाणा): कैथल जिले में सात वर्षीय मासूम बालिका के साथ दुष्कर्म के उपरांत उसकी निर्मम हत्या करने के जघन्य मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है।

हाईकोर्ट ने निचली अदालत द्वारा दोषी पवन उर्फ मोनी को दी गई फांसी की सजा को उम्रकैद में परिवर्तित कर दिया है। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि यहाँ उम्रकैद का अर्थ सामान्य 14 या 20 वर्ष की सजा काटकर रिहा होना नहीं है। दोषी को कम से कम 50 वर्षों की वास्तविक (कठोर) कैद जेल में भुगतनी होगी। इस अवधि के पूर्ण होने के उपरांत ही उसकी रिहाई के विषय पर कानूनी विचार किया जा सकेगा।

💰 दोषी पर 73 लाख रुपये का ऐतिहासिक जुर्माना, पीड़ित बच्ची के परिजनों को मुआवजे के रूप में दी जाएगी राशि

उच्च न्यायालय ने अपराध की वीभत्स प्रकृति और संवेदनशीलता को दृष्टिगत रखते हुए दोषी पवन उर्फ मोनी पर कुल ₹73 लाख का ऐतिहासिक अर्थदंड (जुर्माना) भी आरोपित किया है।

इस जुर्माने की राशि में हत्या के अपराध हेतु ₹50 लाख और पॉक्सो (POCSO) कानून के अंतर्गत ₹23 लाख का जुर्माना सम्मिलित है। अदालत ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि जुर्माने के रूप में वसूल की जाने वाली संपूर्ण राशि पीड़ित बच्ची के माता-पिता तथा भाई-बहनों को समान हिस्सों में मुआवजे के रूप में प्रदान की जाए।

⚖️ 50 साल तक समाज से दूर रहेगा दोषी, जुर्माना न भरने पर भी भुगतनी होगी पूरी सजा

हाईकोर्ट ने फांसी की सजा को कठोर उम्रकैद में बदलते हुए दोषी को एक लंबी अवधि तक समाज से पूरी तरह पृथक रखने का आदेश दिया है।

अदालत ने अपने फैसले में यह भी ताकीद की है कि यदि दोषी निर्धारित जुर्माने की भारी-भरकम राशि जमा करने में असमर्थ रहता है, तो केवल इस आधार पर उसकी रिहाई का कोई मार्ग प्रशस्त नहीं होगा। उसे अदालत द्वारा तय की गई 50 वर्ष की वास्तविक कैद की अवधि पूरी करनी ही होगी, जबकि जुर्माने की वसूली के लिए नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई पृथक से जारी रहेगी।

📜 वर्ष 2022 का है जघन्य मामला, 7 साल की बच्ची का मिला था आधा जला हुआ शव

यह अत्यंत हृदयविदारक घटना कैथल जिले के एक ग्रामीण इलाके की है।

8 अक्टूबर 2022 को सात वर्ष की मासूम बच्ची अपने घर के बाहर खेलते समय रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हो गई थी। अगले दिन पुलिस को गांव के समीप ही बच्ची का आधा जला हुआ शव बरामद हुआ था। गहन पुलिस जांच के पश्चात पवन उर्फ मोनी को मुख्य आरोपी के रूप में गिरफ्तार किया गया था। सत्र न्यायालय द्वारा फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद दोषी ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर फैसले को चुनौती दी थी, जिस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने यह कठोर निर्णय दिया है।

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